By Kumar Sundaram पोखरण परमाणु परीक्षणों का विरोध सिर्फ शान्ति के सरोकार से बल्कि इस देश के लोकतंत्र के लिहाज़ से भी ज़रूरी है. भारत की आर्थिक संप्रभुता और सारे संसाधन बेच खाने वाली पार्टी ने परमाणु टेस्ट कर के सैन्य-राष्ट्रवाद का फर्जी गुब्बारा फुलाया और भारत की राजनीति ने इस दिन एक निर्णायक दक्षिणपंथी राह पकड़ ली. 1998 में ही इस बात को रेखांकित करते हुए अनिल चौधरी जी ने यह लेख लिखा था. …read more

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